कह दो गोरिया ...
घुंघरु क्या बोले क्या बोले क्या बोले?
लाज लगे, पग रोके,
मुझे देख अकेली,पथ रोके,
पैन्जनीया, मनवा पग रोके पग रोके,
घुंघरु क्या बोले क्या बोले क्या बोले?
लाज लगे, पग रोके,
मुझे देख अकेली,पथ रोके,
पैन्जनीया, मनवा पग रोके पग रोके,
ना शोर मचा, जग जायेगा जग,
बढेगी मोरी उलझन,
ताको वे बोले, ये बोले,
घुँघरु ये बोले!
-- लावण्या



चित्र और रचना-दोनों बढ़िया.
ReplyDeleteधन्यवाद समीर भाई !
ReplyDeleteस -स्नेह,
लावन्या
स स्नेह,
लावण्या
Lavanyaji
ReplyDeleteWish Ghoonghroo could speak...
Plenty of stories would be unfolded.....
Nice poem.
Rgds.
मैडम चरणस्पर्श,
ReplyDeleteनये देश नये रास्तों पर पहले पहल चलना कठीन जान पड़ रहा है इसकारण थोड़ा व्यस्त हूँ…।
बहुत याद कर रहा था आपको और आपकी उत्कृष्टतम रचनाओं को…।
क्या बात कही है…जैसे चित्र हैं वैसे ही उसकी अहसास भरी शाब्दिक व्यंजना…।
अपने ब्लाग पर भी कुछ लिखा है…बहुत दिनों बाद आपके आशीर्वाद की प्रतिक्षा है…।
Harshad bhai,
ReplyDeleteIF the Ghoonghroos could Utter they surely would SING & Reveal
all the RAAZ :)
Very true !!
Rgds,
L
दीव्याभ,
ReplyDeleteगहरी सम्वेदना रखते हो -
काश जीवन के श्याम धवल के साथ इन्द्रधनुषी रँगोँ को भी जीयोगे तब
जीवन पूर्ण रुपेण परिपूर्ण हो जायेगा !
जीवन यात्रा का हर नया मोड नई उर्जा माँगता है जब मेहनत व लगन से सार्ता काट लोगे तब मुडकर देखने पर
सम्तोष ही होगा - मेरे आशिष सदेव साथ हैँ -
आपके स्नेह व सद्`भाव के लिये कृतार्थ हूँ
अस्तु, स्नेह व आशिष भेज रही हूँ !
-- लावण्या
lekh padhna toh yahan ek aadat ho gayi..jo chut sakti hai...per aapke geet...wah!dil kush ho jaata hai,aur fir bhaiya ne bilkul sahi kaha hai...
ReplyDeletepranam!
aditi,
ReplyDeletebahot aabhar aapka ...mere geet pasand aate hain sun ker khushee huee ..
sa sneh,
lavanya