Thursday, March 29, 2007

चाँद उग आया पूनम का + " क्षितिज पत्रिका"

सौ. हर्षा व अम्ररेन्द्रजी - ग्रेन्ड केनीयन के आगे खडे हुए हैँ


चाँद उग आया पूनम का ...

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चाँद उग आया पूनम का ...

नीले स्याह आकाश मेँ,

क्षितिज रेखा से उतर,

उज्ज्वलतम, चँद्र शरद का,

ठिठुरती, काली रात मेँ,

चाँद उग आया पूनम का ...
सूखी टहनियोँ ने भी

अपनी बाँहेँ उचकाकर,

सहलाया, दुलराया, पास बुलाया,

जाडे की सिहरन मेँ, हिल हिलकर,

जर्जर आँचल मेँ, उसे छिपाया !

चाँद उग आया पूनम का ...



" क्षितिज पत्रिका" , वेब पर भी उपलब्ध है जिसे बडे जतन से

मेरे युवा मित्र , भाई श्री अमरेन्द्र जी कडी कठिनायोँ के बावजूद,

नियमित रुपसे प्रकाशित करते हैँ -

हिन्दी सेवा का ये सफल प्रयास उत्तर अमरीका मेँ ,

कार्यरत रहते हुए,

बिना किसीके सहयोग के भी

अमरेन्द्र जी ने कर दीखलाया है.

उनकी पत्नी सौ . हर्षा ने भी ये जिम्मेवारी को सुँदर चित्रोँ से सजाकर

एक आदर्श दम्पत्ति का उदाहरण पेश किया है.

मेरी यह कृति "मैँ ," क्षितिज " पत्रिका व उसीके वेब सँस्करण के लिय्रे,

शुभेच्छाओँ के साथ, समर्पित करती हूँ -

- साथ ही,

"नव - दम्पत्ति जहाँ भी रहेँ, सुख से रहेँ "

ये भी कामना करती हूँ -

- अस्तु,

प्रस्तुत है क्षितिज के लिये लिखी मेरी निम्न कविता : ~~

6 Comments:

Blogger Harshad Jangla said...

How noble and thoughtful of you to send these wishes to Amrendrabhai.
Can we get the web address of 'Kshitij Patrika'

Rgds and best wishes to the 'Ideal Couple'

3:51 PM  
Blogger manya said...

Bahut sundar kawita.. poonam ke saundarya si.. chaandni to aake shabdon mein bikhari hoti hai...sharad ritu mein bhi aapke shabadon mein ushanta h Mam..

N my regards to this wonderful couple n best wishes for their Magazine...

Regards
Manya

10:30 PM  
Blogger miredmirage said...

एक और सुन्दर कविता।
घुघूती बासूती

3:58 AM  
Blogger antarman said...

Harshad bhai,
I will put up Kshitik Patrika's Url soon --
The couple has moved 3 /4 hrs away
hence this dedication from me :)
Rgds,
L

9:50 PM  
Blogger antarman said...

घुघूती जी,
नमस्कार!
आप के आने से व आपकी टिप्पणी से उत्साह मिलता है --
कृपया ऐसा स्नेह बनाये रखिएगा --
आभारी हूँ
सादर,
लावण्या

9:52 PM  
Blogger antarman said...

Thank you Manya -- KSHITIJ is indeed a wonderful Patrika & Amrendra ki Kahaniyaan was recently published by PENGUIN BOOKS ( India branch ) --
I'm so glad you liked my poem --
It makes all the difference to read your nice comments.
Warm Regards,
L

9:54 PM  

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