Saturday, December 16, 2006

watching the snow capped Mountains : ~~

( Annapurna mountain ranges in Himalaya - height 2748 Meters -- above the Sea level )


मेरे अन्तरपट पर इन गिरि शृगोँ की पडती छाया
साँध्य गुलाबोँ से रँजित है,जिनकी भीषण दुर्गमता,
फिर भी, मेरे प्राण, पलक पर बैठ, अकुलाते,
शाँत - सौम्य, हिम के प्यासे, है कैसी यह पागल, ममता !
" mere antar pata para een giri shrungon kee padatee chaaya
saandhya gulabon se ranjita hai, jinakee bheeshana durgamata,
fir bhee, mere praan, palak para baith, akulate,
shant shubhra , hma ke pyaase,
hai kaisee ye, pagal mamta ! "
( poet : late Pt. Narendra sharma )


( -- रचनाकार : स्व. पँ. नरेन्द्र शर्मा )
" yea in my mind those mountains arise
their perils dyed with evening's Rose !
and still my ghost, sits at my eyes,
and thirsts for their, untroubled snow ! "
( poet : Walter de la Mer )

2 Comments:

Blogger Dr.Bhawna said...

बहुत सुन्दर रचना है।

9:16 AM  
Blogger antarman said...

जी --
न जाने कितने वर्षोँ से स्मृति पटल पर अँकित हैँ !
आज ब्लोग पर रख पाई हूँ जिसे आपने पढकर सराहा -
समय एक विशाल महासागर सा प्रतीत होता है -इस सन्दर्भ से -

स - स्नेह, लावण्या

10:49 AM  

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