Wednesday, January 10, 2007

रात को


रात को शबनम झरेगी,
जब महकते गेसूओँ पर,
थरथरायेँगीँ बाँहेँ, तुम्हारी
काँप कर वीराने मेँ....
कब हम तुम, एक साथ,
झुक कर, खिडकियोँ से,
देखेँगेँ,अश्कोँ को, बहते,
सुखते, एक दुजे के चेहरे पे?

3 Comments:

Anonymous Anonymous said...

Hello Madam,Oh!so much in so little words.It made me speechless but for me this picture is bit filmy so i think--pahucha deti hai jaise najam apki ek aur hi Duniya me wohi tasvir me bhi dikhe to kuch baat aur ho...but this is my personal opinion so don't take it otherwise.
Thnx.

11:29 AM  
Blogger antarman said...

ooh come come ..."filmy " isn't such an unappetizing entity ! :)
I say so, 'cause my roots r entangled in "filmy family " --

I thank you for your kind words.

Agar aap ees najam ke layak koyee tasveer bata den tub eese hata dengen. thik hai na ? So please find an appropriate pic. for my najm.

shukriya....

11:58 AM  
Blogger महावीर said...

थोड़ी देर के लिए यह भूल जाएं कि चित्र में हृतिक और ऐश्वर्या राय नहीं बल्कि इस
कविता के नायक और नायिका हैं, तो यह फिल्मी परेशानी भी दूर हो जाती है। लड़की
के चित्र (ऐश्वर्या नहीं) में भाव-भंगिमा देखें तो 'रात को शबनम झरेगी' पंक्ति उसके
उदगारों को पूर्ण रूप से व्यक्त कर रही है। दूसरे चित्र के लिए भी यही कहा जा सकता है।
वो बात अलग है कि अन्य चित्र भी मिल सकते हैं, किंतु लेने से पहले उनके सर्वाधिकार
को भी सोचना पड़ता है। अतः इस चित्र को भी औचित्य की परिधि में रखने में आपत्ति
नहीं होनी चाहिए।

2:52 PM  

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