Sunday, April 15, 2007

नर्मदे हर ! नर्मेदे हर !--नर्मदा क्षेत्र के तीर्थ स्थान : भाग - ४


नर्मदा क्षेत्र के तीर्थ स्थान :

उत्तर दिशा मेँ स्थित यात्रा के स्थलोँ की सूची इस प्रकार है --१) परशुराम - हरी धाम २) भड भूतेश्वर, ३) भरुच,४) शुक्ल तीर्थ,५) शिमोर,६) बडा कोरल ७) नारेश्वर जो श्री रँग अवधूत जी का आश्रम स्थल है ८) माल्सार ९) झानोर १०) अनसुआ ११) बद्री नारायन १२) गँगनाथ १३ ) चानोड ,जो दक्षिण का प्रयाग कहलाता है १४ ) कर्नाली १५ ) तिलकवाडा १६) गरुडेश्वर १७) हम्फेश्वर १८) कोटेश्वर १९) माधवगढ या रेवाकुँड २०) विमलेश्वर या अर्धनारेश्वर २१) माहेश्वर २२) मँडेलश्वर २३) बडवाहा २४) ओम्कारेश्वर २५) २४ अवतार २६) श्री सीतावन २७) ध्याधि कुँड २८ ) सिध्धनाथ २९) भृगु कुत्छ ३०) सोकालीपुर ३१) ब्राह्मणघाट ३२) भेडाघाट३३) धुँधाधार ३४) तिलवाराघाट ३५) गौरीघाट ३६) जल हरी घाट ३७) मँडला घाट ३८) लिँग घाट या सूर्यमुखी नर्मदा ३९) कनैया घाट ४०) भीम कुँडी४१) कपिल धारा ४२) अमर कँटक धाम ४३) माँ की बगिया ४४) सोनधार या सुवर्ण प्रपात ४५) नर्मदा उद्`गमस्थली --
नर्मदा माई की प्रशस्ति, जगद्`गुरु श्री शँकराचार्य जी ने " नर्मदाअष्टक " की रचना करके भारतीय मानस मेँ प्रतिष्ठित कर दीया है
अक्सर कहा जाता है कि, "नदी का स्त्रोत और साधु का गोत्र कभी न पूछेँ ! "
परन्तु जब भी धीमे, शाँत जल प्रवाह को दुस्तर पहाड के बीच रास्ता निकाल कर बहते हुए जब भी हम देखते हैँ तब ये सवाल मन मेँ उठता ही है कि, इतना सारा जल कहाँ से आता होगा ?
इस
महान नदी का अस्त्तित्व कैसे सँभव हुआ होगा ?
जीवनदायी, पोषणकारी निर्मल जलधारा हमेँ मनोमन्थन करवाते हुए, परमात्मा के साक्षात्कार के लिये प्रेरित करती है जो इस शक्ति के मूल स्त्रोत की तरफ एक मौन सँकेत कर देती है --
पँचमहाभूतमेँ से जल तत्व आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी से मानव शरीर सूक्ष्म रुप मेँ ग्रहण करता है उसीसे जल तत्व से हमारा कुदरती सँबध शापित हुआ है -- जल स्नान से हमेँ स्फुर्ति व आनण्द मिलता है - थकान दूर होकर मन और शरीर दोनोँ प्रफुल्लित होते हैँ और जब ऐसाअ जल हो जो प्रवाहमान हो, मर्र मर्र स्वर से कल कल स्वर से बहता हो , सँगीत लेकर चलता हो, शीतल हो तब तो प्रसन्नता द्वीगुणीत हो जाती है ! और ऐसा नदी स्नान हमारी स्मृतियोँमेँ सदा के लिये बस जाता है ! जिसकी याद आती रहती है --

लेखिका : लावण्या


8 Comments:

Blogger Harshad Jangla said...

Very Very interesting.

Thanx & Rgds.

6:01 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

बड़ी रोचक श्रृंखला!!

2:51 AM  
Blogger Priyankar said...

पहला चित्र प्रकृति की सुंदर कविता है तो दूसरा चित्र भारतीय संस्कृति की अद्भुत कथा .

3:42 AM  
Blogger antarman-- said...

Dhanywaad Harshad bhai -
Rgds,
L

8:48 AM  
Blogger antarman-- said...

आभार आपका समीर भाई !

8:48 AM  
Blogger antarman-- said...

प्रियँकरजी,
मेरे लेखको पढने का और टिप्पणी रखने का शुक्रिया-
स -स्नेह,
लावण्या

8:49 AM  
Blogger Divine India said...

बहुत उम्दा रचना है…श्रृंखला की रोचकता को आपने बरकरार रखा है…।

12:21 PM  
Blogger antarman-- said...

दीव्याभ,
नर्मदा बचाओ आँदोलन से भी कई साल हुए, नर्मदा जी पर लोगोँ का ध्यान आया था उस वक्त यह कुछ सामग्री
सम्शोधन करके इकट्ठा की थीँ -- वही प्रस्तुत है --
पसॅम्द आईँ तब तो लिखना सफल हो गया -धन्यवाद!

9:16 PM  

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