Thursday, April 19, 2007

मासूमोँ का खून बहा कर तुम्हेँ क्या मिला " चो " ?



कहाँ हमारे महान सँत महापुरुष और कहाँ ऐसे भूले भटके नवयुवक ? कितनी बडी खाई है -- सोचने मेँ , समझने मेँ -- जब ऐसे निर्मम युवा की तस्वीर यहाँ दे रही हूँ तब इस पापात्मा को मार्ग दीखलाने के लिये, इन विभूतियोँ को भी यहाँ आदरणीय स्थान देना चाहती हूँ -- शायद उनकी असीम अनुकँपासे इस जीव का उध्धार हो जाये, क्या पता ? :-(




मासूमोँ का खून बहा कर तुम्हेँ क्या मिला " चो " ?????
ये तस्वीरेँ हैँ जो न्युयोर्क के अखबार मेँ छपी हैँ --
दिवँगतोँ की आत्मा को परम कृपालु ईश्वर अपनी ज्योति मेँ समाहित करेँ और शाँति प्रदान करेँ यही नम्र प्रार्थना है मेरी !!!!
-- जीवन इसी का नाम है कहीँ पर शादी की खुशीयाँ, नाचगाना, सँगीत के स्वर गूँजते हैँ तो कहीँ मातम छाया रहता है दबी सिसकीयाँ सूनी आँखोँ स्वजन की आकृति की प्रतीक्षा करतीँ हैँ !
दुखद
समाचार है -- सोच रही हूँ कि, "चो" जैसे नवयुवक के आथ दूसरे युवा सहपाठीयोँ ने , ऐसा क्या किया होगा कि उसे इतना गुस्सा आ गया ?
बार युवा पीढी पर पढाई का बेहिसाब बोझ लाद दीया जाता है, आगामी भविष्व मेँ उन्हेँ अच्छी नौकरी की तलाश, मिलेगी या नहीँ ? पढाई कैसी रहेगी ? सफलता मिलेगी या नहीँ ? उस पर यौवनावस्था मेँ , किस तरह के मित्र मिलते हैँ, उनसे कैसे अनुभव हासिल होते हैँ , परिवार कहाँ तक सह्हयता कर पाता है, जीवन साथी की तलाश के दुर्गम पडाव, ये कई सारे मानसिक दबाव व तनाव रहते हैँ और इन सारे कोणोँ मेँ जहाँ भी रिक्त्तता रहती है, वहीँ से निराशा गहरे पानी की तरह आकँठ आ घेरती है --

5 Comments:

Blogger Harshad Jangla said...

Lavanyaji

These kind of happenings leave a question in mind: What sin these innocent young students have committed for having been killed by a monster, a maniac,a psychic....I dont find an appropriate word for this killer!!!

6:18 PM  
Blogger antarman-- said...

Harshad bhai,

Such colossal tagedies has us dumbfound with deep grief at the loss of innocent lives. so many disturbed families whose wonderful children were brutally gunned down in the prime of their youth ! :-(
What is happening to the "Sanity "
of people ? -------
I too can not find adequate words at such an occurance !
But, I pray for all who lost their lives. May Peace be upon them through the Grace of Shree Krishna
With somber thoughts & a heavy heart,
sincerely,
L

6:44 PM  
Blogger Divine India said...

हमेशा यहाँ आता हूँ कुछ लेकर ही जाता हूँ
छोटा भी हूँ तो सीख भी लेता हूँ
गुनगुनाता हूँ…और समझने का प्रयास भी करता हूँ :)
पता नहीं आज का युवा इतना दबाव कैसे महसूस कर रहा है जबकि पहले से ज्यादा उसे स्वतंत्रता मिल रही है…पर मानसिक अस्थिरता के कारण हमारा विद्रोही स्वभाव बह जाता है…।

12:12 PM  
Blogger antarman-- said...

दीव्याभ,
चलो ...गुनगुनाते रहो ..मुस्कुराते रहो ..
युवावस्था -- बचपन और अधेडावस्था का सँधि काल है -
-अगर सँयत होकर इसे मेहनत करके बिता दिया तब आगे का मार्ग अपने आप खुल जाता है -- धैर्य से साहस से...बढे चलो ..सफलता भी अपने मन पर है !
हर कोई बिल गेट्स थोडे ही बनेगा ? :)

9:32 PM  
Blogger aditi said...

OUTRAGEOUES DEMONSTROTATION OF MENTAL SICKNESS.ANY WORD IS SMALL IN CONDEMNATION OF SUCH KIND OF HENIOUSITY..MANY DIES EVERYDAY DUE TO ONE OR THE OTHER REASONS..ISNT THAT ENOUGH?
OHH!THIS KIND OF ACT..FORCE US TO RETHINK THAT ARE WE REALLY GETTING HAPPIER AND WISER..?
WELL DESERVE NOTE AT YOUR BLOG MA'M.
THANK YOU VERY MUCH!

2:21 AM  

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